मुजरिम तो फिरेंगे सड़कों पर मासूम ही मारे जाएँगे
अश्फ़ाक़ भी दौर-ए-हाज़िर के ग़द्दार पुकारे जाएँगे
घर-घर से तिरंगा निकलेगा घर-घर से भगत सिंह आएँगे
चमकाने वतन के ज़र्रों को हर घर के सितारे जाएँगे
इस देश में फिर से ऊधम भी माटी का क़र्ज़ उतारेंगे
जब नारे राम मुहम्मद के आज़ाद पुकारे जाएँगे
तुम लाख बिछाओ ज़ंजीरें तुम लाख लगा लो पहरे पर
जो हक़ के मुसाफ़िर निकले हैं वो मुल्क पे वारे जाएँगे
फिर बोस की फ़ौजें निकलेंगी दिल्ली के तख़्त हिलाने को
जितने भी यहाँ पर ज़ालिम हैं गद्दी से उतारे जाएँगे
'रेहान' वतन की माटी से ख़ुशबू-ए-वफ़ा ही आएगी
जब वीर सभी इस मिट्टी के मिट्टी में सँवारे जाएँगे
— REHAN KHAN















