तुम को कोई बात बता कर जाने मुझ को क्या होता है

तुम बस हाँ में हाँ करते हो, मेरा 'जी' हल्का होता है

एक शिकारी की नज़रों में, वैसे जाने क्या होता है
पंछी ख़ुद-ब-ख़ुद आता है तीर जिधर चलना होता है

घर में आज़ादी होती है, जिस घर में लड़का होता है
पिंजरे में चिड़ियाँ रहती है उस को देख के दुख होता है

एक बात के पीछे जाने किस का क्या मक़्सद होता है
हम को वो अच्छा लगता है जो सच में अच्छा होता है

जिस
में ज़र्फ़ बची होती है वो उतना ही चुप होता है
वरना शोर तो बरपा ही है, ये होता है वो होता है

— Himanshu Kiran Sharma

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