tumko koi baat batakar jaane mujhko kya hota hai | तुमको कोई बात बताकर जाने मुझको क्या होता है

  - Himanshu Kiran Sharma

तुमको कोई बात बताकर जाने मुझको क्या होता है
तुम बस हाँ में हाँ करते हो, मेरा 'जी' हल्का होता है

एक शिकारी की नज़रों में, वैसे जाने क्या होता है
पंछी ख़ुद-ब-ख़ुद आता है तीर जिधर चलना होता है

घर में आज़ादी होती है, जिस घर मे लड़का होता है
पिंजरे में चिड़ियां रहती है उसको देख के दुःख होता है

एक बात के पीछे जाने किसका क्या मकसद होता है
हम को वो अच्छा लगता है जो सच मे अच्छा होता है

जिसमें ज़र्फ़ बची होती है वो उतना ही चुप होता है
वरना शोर तो बरपा ही है, ये होता है वो होता है

  - Himanshu Kiran Sharma

Ghar Shayari

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    फिर तुम्हारी याद में हम आँख नम करते रहे

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    फिर तिरी यादों से अपने गम को हम भरते रहे

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