dost kuchh aur bhi hain tere alaava mere dost | दोस्त कुछ और भी हैं तेरे अलावा मेरे दोस्त

  - Idris Babar

दोस्त कुछ और भी हैं तेरे अलावा मेरे दोस्त
कई सहरा मेरे हमदम कई दरिया मेरे दोस्त

तू भी हो मैं भी हूँ इक जगह पे और वक़्त भी हो
इतनी गुंजाइशें रखती नहीं दुनिया मेरे दोस्त

तेरी आँखों पे मेरा ख़्वाब-ए-सफ़र ख़त्म हुआ
जैसे साहिल पे उतर जाए सफ़ीना मेरे दोस्त

ज़ीस्त बे-मा'नी वही बे-सर-ओ-सामानी वही
फिर भी जब तक है तेरी धूप का साया मेरे दोस्त

अब तो लगता है जुदाई का सबब कुछ भी न था
आदमी भूल भी सकता है न रस्ता मेरे दोस्त

राह तकते हैं कहीं दूर कई सुस्त चराग़
और हवा तेज़ हुई जाती है अच्छा मेरे दोस्त

  - Idris Babar

Khushboo Shayari

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