ek rishta dard ka hai mere us ke darmiyaañ | एक रिश्ता दर्द का है मेरे उस के दरमियाँ

  - Iftikhar Raghib

एक रिश्ता दर्द का है मेरे उस के दरमियाँ
फिर भी कितना फ़ासला है मेरे उस के दरमियाँ

मेरे उस के दरमियाँ यूँँ ही रहेंगी रंजिशें
कोई जब तक तीसरा है मेरे उस के दरमियाँ

बात हम दोनों की है हम ख़ुद निमट लेंगे कभी
क्यूँ ज़माना बोलता है मेरे उस के दरमियाँ

कल तलक थे साथ हम इक दूसरे के और आज
मुद्दतों का फ़ासला है मेरे उस के दरमियाँ

छोटी-मोटी रंजिशें हैं ख़ुद-ब-ख़ुद मिट जाएँगी
और अभी बिगड़ा ही क्या है मेरे उस के दरमियाँ

उस को भी हो जाएगी मुझ से मोहब्बत पर अभी
गुफ़्तुगू का सिलसिला है मेरे उस के दरमियाँ

आरज़ू दिल की है 'राग़िब' 'उम्र भर रौशन रहे
जो यक़ीं का इक दिया है मेरे उस के दरमियाँ

  - Iftikhar Raghib

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