दिल से जब आह निकल जाएगी

जाँ भी हम-राह निकल जाएगी

दिल में कुछ भी तो न रह जाएगा
जब तिरी चाह निकल जाएगी

हम ने समझा था कि कुछ बरसों में
फ़स्ल-ए-जाँ-काह निकल जाएगी

फिर सभी जोड़ के सर बैठे हैं
फिर कोई राह निकल जाएगी

तुम से मिलने की भी कोई सूरत
इंशा-अल्लाह निकल जाएगी

तोड़ कर सारी फ़सीलें 'राग़िब'
फ़िक्र-ए-आगाह निकल जाएगी

— Iftikhar Raghib

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Afsos Shayari

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