jee chahta hai jeena jazbaat ke mutaabiq | जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़

  - Iftikhar Raghib

जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़
हालात कर रहे हैं हालात के मुताबिक़

जिस दर्जा हिज्र-रुत में आँखें बरस रही हैं
ग़ज़लें भी उग रही हैं बरसात के मुताबिक़

सुख चैन और ख़ुशी का अंदाज़ा मत लगाओ
अस्बाब ओ माल-ओ-ज़र की बुहतात के मुताबिक़

हो शहर के मुताबिक़ हासिल हर इक सहूलत
माहौल पर सुकूँ हो देहात के मुताबिक़

देखो ख़ुलूस-ए-नियत जज़्बात और मोहब्बत
मत चाहतों को तोलो सौग़ात के मुताबिक़

चादर ही के मुताबिक़ फैलाओ पाँव 'राग़िब'
मेआर-ए-ज़ीस्त रक्खा औक़ात के मुताबिक़

  - Iftikhar Raghib

Love Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Iftikhar Raghib

As you were reading Shayari by Iftikhar Raghib

Similar Writers

our suggestion based on Iftikhar Raghib

Similar Moods

As you were reading Love Shayari Shayari