न मुझ को मोहब्बत समझ आएगी
न मुझ को सियासत समझ आएगी
है पैसा बहुत दोस्त इक भी नहीं
उसे कब ये गु़रबत समझ आएगी
मैं शाइ'र हुआ क्यूँ समझते सभी
तुझे कब हक़ीक़त समझ आएगी
कभी तुम भी अफ़ज़ल मोहब्बत करो
तभी तो मोहब्बत समझ आएगी
— S M Afzal Imam
न मुझ को सियासत समझ आएगी
है पैसा बहुत दोस्त इक भी नहीं
उसे कब ये गु़रबत समझ आएगी
मैं शाइ'र हुआ क्यूँ समझते सभी
तुझे कब हक़ीक़त समझ आएगी
कभी तुम भी अफ़ज़ल मोहब्बत करो
तभी तो मोहब्बत समझ आएगी
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