आप जाऍं आप को कुछ काम होगा
मुझ से तो इस वक़्त सिर्फ़ आराम होगा
कहती है वो हो गई मुझ से ख़ता कुछ
इश्क़ में गर आप पे इल्ज़ाम होगा
सर क़लम हो रहबरों के साथ जो है
क्या ज़हानत का यही इन'आम होगा
दिन गुज़र जाएगा दफ़्तर में मिरा पर
इस कमी का दुख मुझे हर शाम होगा
शे'र ऐसे हैं मिरे कि एक दिन वो
वक़्त आएगा मिरा भी नाम होगा
तुम वफ़ा की हर क़सम तोड़ो मुझे तुम
भूल जाओ फिर मुझे आराम होगा
— Taufique Habib















