baad-o-baraan se uljhta khanda-zan girdaab par | बाद-ओ-बाराँ से उलझता ख़ंदा-ज़न गिर्दाब पर

  - Jagan Nath Azad
बाद-ओ-बाराँसेउलझताख़ंदा-ज़नगिर्दाबपर
इकजज़ीरातैरताजाताहैसतह-ए-आबपर
गुमकईसदियोंकाउसमेंजज़्बा-ए-तहक़ीक़है
येजज़ीराआदमीकेज़ेहनकीतख़्लीक़है
जारहाहैहरघड़ीमौजोंसेटकराताहुआ
अपनेहीअंदाज़मेंअपनारजज़गाताहुआ
बहरकीअमवाजपरबहतेहुएशहर-ए-जमील
हरक़दमतेरालिएहैतेरीअज़्मतकीदलील
आँधियोंकाज़ोर,मौजोंकीरवानीतुझमेंहै
इर्तिक़ा-ए-ज़ेहन-ए-इंसाँकीकहानीतुझमेंहै
हरभँवरमेंऔरहरतूफ़ानमेंसाहिलहैतू
सीना-ए-इमरोज़-ओ-फ़र्दाकाधड़कतादिलहैतू
तोतजल्लीहीतजल्लीहैअँधेरीरातमें
रौशनीकाहैमनाराआलम-ए-ज़ुल्मातमें
रातआईजागउठाइंसाँकाज़ौक़-ए-बे-बिसात
आख़िरीइसकाठिकानामर्दज़नकाइख़्तिलात
किसक़दरअर्ज़ांहुएतहज़ीबकेलमआत-ए-नूर
अल्लाहअल्लाहचारजानिबरौशनीकायेवफ़ूर
इसतरहसेमैंनेकबदेखीथीमय-ख़ानेमेंधूम
औरतोंमर्दोंकालड़कोंलड़कियोंकायेहुजूम
सबनशेमेंमस्तहैंलेकिनहैंकितनेबा-ख़बर
फिररहेहैंसबकेसबइकदूसरेकोथामकर
अहमरींसाग़र,लब-ए-ल'अलीं,निगाहेंमय-फ़रोश
हरतरफ़हैएकमस्ती,हरतरफ़हैइकख़रोश
इसजगहइदराकसेबेगानाकोईभीनहीं
सबहैंफ़रज़ानेयहाँदीवानाकोईभीनहीं
अक़्लकीइसबज़्ममेंदीवानगीकाकामक्या
ढूँढताहैतूयहाँकरदिल-ए-नाकामक्या
इतनीआगाहीकिसीकोहोयेमोहलतहीनहीं
किसकीबाहेंकिसकीगर्दनमेंहमाइलहोगईं
केआग़ोश-ए-हवसमेंख़ुदयहाँगिरताहैहुस्न
किसक़दरकच्चेसहारेढूँढताफिरताहैहुस्न
जिससेख़ीरातेरीआँखेंहैंचमकयूरोपकीहै
देख'आज़ाद'!येपहलीझलकयूरोपकीहै
  - Jagan Nath Azad
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