हदीस-ए-दिलबराँहैऔरमैंहूँ
जहाँ-अंदर-जहाँहैऔरमैंहूँ
मुदावा-ए-ग़म-ए-फ़ुर्क़तनहींकुछ
बसउनकीदास्ताँहैऔरमैंहूँ
नहमदमहैनकोईहम-नवाँहै
दिलअपनाराज़दाँहैऔरमैंहूँ
भरीमहफ़िलमेंभीबैठाहूँतन्हा
मिरादर्द-ए-निहाँहैऔरमैंहूँ
नहींदर्द-आश्नाजिससेकहूँकुछ
मिरेमुँहमेंज़बाँहैऔरमैंहूँ
बहारआईचमनमेंआईहोगी
यहाँदौर-ए-ख़िज़ाँहैऔरमैंहूँ
नहींबाक़ीवोनग़्माऔरतराना
बसइकहूँकासमाँहैऔरमैंहूँ
नवोसाक़ीनवोहम-मशरबअपने
जुमूद-ए-मय-कशाँहैऔरमैंहूँ
कभीइसदिलकीज़दमेंथाज़माना
अबइकउतरीकमाँहैऔरमैंहूँ
नहींमोहलतकिदमभरमुड़केदेखूँ
मिरीउम्र-ए-रवाँहैऔरमैंहूँ
नख़ुदअपनानअपनेहैंशब-ओ-रोज़
रज़ा-ए-दीगराँहैऔरमैंहूँ
हुआबेज़ारनाक़ूस-ए-अज़ाँसे
फ़रेब-ए-ईन-ओ-आँहैऔरमैंहूँ
कभीकाजलचुकागोआशियाना
ख़याल-ए-आशियाँहैऔरमैंहूँ
'हबीब'अबज़िंदगीकीशामआई
ग़म-ए-सूद-ओ-ज़ियाँहैऔरमैंहूँ