tumhein yaad hogaa | तुम्हें याद होगा

  - Janan Malik
तुम्हेंयादहोगा
तुमनेमुझेपिछलेबरसख़तमेंअप्रैलभेजा
जोमुझतकपहुँचतेपहुँचतेअगस्तहोगया
लफ़्ज़पीलेपत्तोंकीतरह
फ़र्शपरबिखरगए
दिसम्बरकीसर्दरातोंमें
मैंवा'दोंकेआतिश-दानपर
बैठीजागतीरही
मेरीरगोंमेंजमाहुआदिसम्बर
आँखोंसेपिघलकर
बहतारहताहै
इसबरसमुझे
ख़तमेंकुछनहींभेजना
कुछभीनहीं
शायदअज़िय्यतोंसेभरी
शाख़ोंपर
किसीवा'देकीकोंपल
फूटपड़े
मौसमोंकाक्याहैकबबदलजाएँ
बे-ए'तिबारलहजोंकीतरह
वक़्तसबकुछउलटपलटरहाहै
शायदतुम्हारेलौटनेतक
बहुतकुछवैसारहे
जैसातुमछोड़गएथे
लोहेकेजबड़े
मिट्टीकेमल्बूस
कोतार-तारकरतेजारहेहैं
पुलजहाँसेतुमपार्ककेकिनारे
खड़ेदिखाईदेतेथे
वोमंज़रमेट्रोबसनेनिगललियाहै
सुम्बुलकेपेड़ोंकीजगहशॉपिंगमॉललेचुकाहै
औरहाँ
वोफूलोंवालीदुकान
जहाँसेहमबुकेलेतेथे
वहाँफास्टफूडबनगया
दिलकीजगहअंतड़ियोंनेलेलीहै
क्याकुछऔरकैसेबदलजाताहै
  - Janan Malik
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Aawargi Shayari

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