अगर दुश्मन तिरा कोई नहीं है
समझ ले तुझ
में हक़-गोई नहीं है
ख़ुदा की ज़ात से उम्मीद रखिए
यहीं है ज़िन्दगी खोई नहीं है
दुवा'ओं का उजाला मिल रहा है
मिरी माँ अब तलक सोई नहीं है
जहाँ में काटना पड़ता है वो भी
जो फ़सलें हम ने ख़ुद बोई नहीं है
हमारी माँ को मेरा हाल कहदो
बहुत अर्सा हुआ रोई नहीं है
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