"तेरी आँखें"

यार तेरी आँखों की
तस्वीर बनाना मुश्किल है
और फिर उस पर कोई
ग़ज़ल सुनाना मुश्किल है

कोई कहता है शराब सी
नशीली है तेरी आँखें
कोई कहता है साफ पानी सी
नीली हैं तेरी आँखें

अरे मुझ से पूछो उस की आँखों में
कितनी गहराई हैं
जैसे कोई सुरंग है
जैसे कोई खाई है

अगर देखी होती तेरी आँखें
तो इतने मक़बूल नहीं होते
न्यूटन के ये सारे लॉ
ये कोई रूल नहीं होते

किरचौफ के वो रूल
वो थ्योरी ये बताती है
कैसे सारी आँखें
तेरी आँखों पर रुक जाती हैं

आर्यभट्ट ने जब बताया था
ये पृथ्वी गोल है
इस बात में तेरी आँखों का
बेहतरीन रोल हैं

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
इस बात को दर्शाता है
तेरी आँखों में हैं धन आवेश
जिस
में ये ऋणावेश जाता है

एक बात बताओ ये पीरियोडिक टेबल
क्यूँ पढ़ते हो यारों
उस की आँखें ही रंगीन हैं
और उस
में साल्ट हैं हजारों

ख़ुदा तेरी आँखें अगर
बहुत पहले ही बना देता
तो रामानुजन सारे फॉर्मूले
तेरी आँखों में ही बता देता

तेरी आँखों में ही खोये रहते
ये दुनिया ईजाद करने वाले
ख़ामोश देखते ही रहते
ये नेता बात करने वाले

इस के आगे कैसे लिखूँ
वो सामने आ बैठी है
मैं भूल गया ये इंदौर है
या लखनऊ है या अमेठी है

हाँ याद आया तेरी आँखों की
तस्वीर बनाना मुश्किल है
और फिर उस पर कोई
ग़ज़ल सुनाना मुश्किल है

— "Nadeem khan' Kaavish"

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Bekhabri Shayari

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