haqeeqaton ka jalaal denge sadaaqaton ka jamaal denge | हक़ीक़तों का जलाल देंगे सदाक़तों का जमाल देंगे

  - Kaleem Aajiz

हक़ीक़तों का जलाल देंगे सदाक़तों का जमाल देंगे
तुझे भी हम ऐ ग़म-ए-ज़माना ग़ज़ल के साँचे में ढाल देंगे

तपिश पतिंगों को बख़्श देंगे लहू चराग़ों में ढाल देंगे
हम उन की महफ़िल में रह गए हैं तो उन की महफ़िल सँभाल देंगे

न बंदा-ए-अक़्ल-ओ-होश देंगे न अहल-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल देंगे
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों को जो दराज़ी तुम्हारे आशुफ़्ता-हाल देंगे

ये अक़्ल वाले इसी तरह से हमें फ़रेब-ए-कमाल देंगे
जुनूँ के दामन से फूल चुन कर ख़िरद के दामन में डाल देंगे

हमारी आशुफ़्तगी सलामत सुलझ ही जाएगी ज़ुल्फ़-ए-दौराँ
जो पेच-ओ-ख़म रह गया है बाक़ी वो पेच-ओ-ख़म भी निकाल देंगे

जनाब-ए-शैख़ अपनी फ़िक्र कीजे कि अब ये फ़रमान-ए-बरहमन है
बुतों को सज्दा नहीं करोगे तो बुत-कदे से निकाल देंगे

  - Kaleem Aajiz

Gulshan Shayari

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