"मैं और मेरी दुनिया"

एक ऐसी दुनिया
जिस
में सिर्फ़ मैं हूँ और
सब कुछ मेरे इर्द-गिर्द बुना हुआ
जहाँ ख़यालों का आसमाँ है
और दिल की ज़मीं है
ख़्वाबों के कुछ शजर हैं
नीचे अश्कों की नमी है
ख़ुशियों की हवा है जो
हौले से मुझे छू कर
मुस्कुराते हुए गुज़र जाती है
ग़मो की बारिश भी है
जो दिल की ज़मीं सोख लेती है
और तन्हाइयों के मौसम में
अक्सर उगने लगते है
अहसास के नन्हे पौधे
खिलने लगती है उन
में
अल्फ़ाज़ की नन्ही कलियाँ
और फिर बिखर जाती हैं
सफ़्हों की फ़िज़ा में कोई
ग़ज़ल या नज़्म बनकर

— Priya omar

More by Priya omar

Other nazm from the same pen

See all from Priya omar →

Dil Shayari

Shers of dil.

All Dil Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling