आँखें जब पुर ख़स्ता होंगी उस पल धक से उतरेगा
दिल में उतरने वाला तो बस एक झलक से उतरेगा
सबको घर की लक्ष्मी चाहिए चंडी से सब डरते हैं
तेरे भोले भंडारी सा कौन फलक से उतरेगा
खोने की नहीं पाने की है जितनी भी बेचैनी है
नींद बराबर आयेगी जब ख़्वाब पलक से उतरेगा
लाख बड़ी बातें कर सीरत की सच तो यही है कीर्ति
आँख को जब तक भाए नहीं नीचे न हलक से उतरेगा
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