aankhen jab pur khasta hongi us pal dhak se utarega | आँखें जब पुर ख़स्ता होंगी उस पल धक से उतरेगा

  - Shayra kirti

आँखें जब पुर ख़स्ता होंगी उस पल धक से उतरेगा
दिल में उतरने वाला तो बस एक झलक से उतरेगा

सबको घर की लक्ष्मी चाहिए चंडी से सब डरते हैं
तेरे भोले भंडारी सा कौन फलक से उतरेगा

खोने की नहीं पाने की है जितनी भी बेचैनी है
नींद बराबर आयेगी जब ख़्वाब पलक से उतरेगा

लाख बड़ी बातें कर सीरत की सच तो यही है कीर्ति
आँख को जब तक भाए नहीं नीचे न हलक से उतरेगा

  - Shayra kirti

Nigaah Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shayra kirti

As you were reading Shayari by Shayra kirti

Similar Writers

our suggestion based on Shayra kirti

Similar Moods

As you were reading Nigaah Shayari Shayari