नए नए प्यार ग़ैर के हो
वली ख़बरदार ग़ैर के हो
वही मुहब्बत वही रक़ाबत
उसी तरह यार ग़ैर के हो
बजा तुम्हारी भी हम सुनेंगे
भले तरफ़ दार ग़ैर के हो
हमें न उस का बनाओ मुल्ज़िम
अगर गिरफ़्तार ग़ैर के हो
हमारा मर्ज़ एक ही है लेकिन
मरीज़ तुम यार ग़ैर के हो
— Shayra kirti















