ye hijr tumhaare bas ka nai ye raat tumhaare bas ki nai | ये हिज़्र तुम्हारे बस का नइ ये रात तुम्हारे बस की नइ

  - Shayra kirti

ये हिज़्र तुम्हारे बस का नइ ये रात तुम्हारे बस की नइ
ये बात है हाथ बढ़ाने की ये बात तुम्हारे बस की नइ

ये 'इश्क़ तराज़ू है जानाँ बस एक ही पलड़ा है इस
में
देना देना देते रहना ये दात तुम्हारे बस की नइ

जो हार के ज़िंदगी जीता है वही जीता है यहाँ हार के भी
ये जीत तुम्हारे बस की नइ ये मात तुम्हारे बस की नइ

तुम सावन की पैदाइश हो मौसम की जायज़ बारिश हो
मुझ एसी पूस दिसंबर की बरसात तुम्हारे बस की नइ

अभी वक़्त है कीर्ति होने में लुत्फ़-ए-आसाइश खोने में
तन्हाई बेचैनी वहशत ज़ुल्मात तुम्हारे बस की नइ

  - Shayra kirti

Zindagi Shayari

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