ये हिज़्र तुम्हारे बस का नइ ये रात तुम्हारे बस की नइ
ये बात है हाथ बढ़ाने की ये बात तुम्हारे बस की नइ
ये 'इश्क़ तराज़ू है जानाँ बस एक ही पलड़ा है इस
में
देना देना देते रहना ये दात तुम्हारे बस की नइ
जो हार के ज़िंदगी जीता है वही जीता है यहाँ हार के भी
ये जीत तुम्हारे बस की नइ ये मात तुम्हारे बस की नइ
तुम सावन की पैदाइश हो मौसम की जायज़ बारिश हो
मुझ एसी पूस दिसंबर की बरसात तुम्हारे बस की नइ
अभी वक़्त है कीर्ति होने में लुत्फ़-ए-आसाइश खोने में
तन्हाई बेचैनी वहशत ज़ुल्मात तुम्हारे बस की नइ
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shayra kirti
our suggestion based on Shayra kirti
As you were reading Zindagi Shayari Shayari