कुछ ऐसा तो अभी सोचा नहीं है

कि जो मेरा है वो उस का नहीं है

मुरव्वत से ज़रा धुंदली हैं आँखें
ये मत समझो नज़र आता नहीं है

अभी कल ही तो कुछ वादे किए थे
तुम्हारा हाफ़िज़ा अच्छा नहीं है

यही तो जड़ है सारी नफ़रतों की
मोहब्बत को कोई समझा नहीं है

तुम औरत हो ज़रा मोहतात रहना
ज़माना इस क़दर बदला नहीं है

हमारे मुँह पे हम से झूट बोले
हमारा आइना ऐसा नहीं है

— Majid Ali Kavish

Dhokha Shayari

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