"तू नहीं मिल रहा"

तेरे साथ अब वक़्त
बिताने के लिए
नहीं मिल रहा
लिखने के लिए
नया शे'र
ज़माने के लिए
नहीं मिल रहा

तू नहीं मिल रहा तो
ज़्यादा फ़र्क़ नहीं
ज़िन्दगी में
हाँ बस
वक़्त आज-कल
मुस्कराने के लिए
नहीं मिल रहा

ऐसा नहीं कि
ग़म किसी को
बताना नहीं चाहता हूँ मैं
ऐसा है कि मुझ को
बताने के लिए
तू नहीं मिल रहा
बस वक़्त आज-कल
मुस्कराने के लिए
नहीं मिल रहा

— Manas Ank

More by Manas Ank

Other nazm from the same pen

See all from Manas Ank →

Udasi Shayari

Shers of udasi.

All Udasi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling