anjuman men kamii rahi hai ab | अंजुमन में कमी रही है अब

  - Manohar Shimpi

अंजुमन में कमी रही है अब
दिल में चाहत तेरी वही है अब

हाँ सितारों से दिल-कशी तो है
हुस्न के रंग ही सही है अब

एक ख़्वाहिश रही कभी से ही
तुझ से मिलके लगे सही है अब

कौन होता यहाँ किसी का ही
सोच के वो तरस रही है अब

ज़िंदगी चाँद पर बसाए क्या
सोचना ही लगे सही है अब

शबनमिस्तान में तजल्ली है
दिल्लगी ओस सी रही है अब

आसमाँ में नुजूम क्या ही है
चाँद पर ज़िंदगी कही है अब

अक्स बनके कभी तलक रहता
आँख से दूर ही सही है अब

  - Manohar Shimpi

Chaand Shayari

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