mudd'a hi agar rahe umdaa | मुद्द'आ ही अगर रहे उम्दा

  - Manohar Shimpi

मुद्द'आ ही अगर रहे उम्दा
'इश्क़ का फिर असर रहे उम्दा

रास्ते में गिला किसे कीजे
काश वो रहगुज़र रहे उम्दा

एक उम्मीद ही हमें होती
सच कहें हम-सफ़र रहे उम्दा

सच ग़लत जब कभी छपे तो क्या
जो सुनी वो ख़बर रहे उम्दा

कब तग़ाफ़ुल हुए बताओ ना
इसलिए ही नज़र रहे उम्दा

एक ख़्वाहिश रहे यहाँ सबकी
काश इक ख़ास घर रहे उम्दा

जब शब-ए-हिज्र ही रहे छोटी
साथ उस के सहर रहे उम्दा

'इश्क़ बहता सदा बयारों सा
थामने को जिगर रहे उम्दा

  - Manohar Shimpi

Valentine Shayari

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