बलंदी पर भी दुश्वारी दिखेगी
मशक़्क़त ही वहाँ सारी दिखेगी
अगर धोखा मिला है दोस्ती में
वहाँ पर यार मक्कारी दिखेगी
ज़ियाफ़त कोई बच्ची जब करे तब
खुले दिल से कहूँ प्यारी दिखेगी
जफ़ा में बेवफ़ा जब सच बताए
वफ़ा में फिर वफ़ादारी दिखेगी
अदालत या अदावत कब रुकी है
लड़ाई हक़ की तो जारी दिखेगी
अभी तो हुस्न का उसके कहें क्या
बिना वो साज़ के प्यारी दिखेगी
लड़े औलाद के जब वास्ते माँ
अदालत में न माँ हारी दिखेगी
'मनोहर' क्या किसी से ही कहे अब
ग़रीबों में ही ख़ुद्दारी दिखेगी
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