"वहम"
न जाने क्यूँ ये लगता है
वो वापस लौट आएगा
मिरे होंठों को चूमेगा
मुझे सीने लगाएगा
सुनेगा कुछ वो मेरी
और कुछ अपनी सुनाएगा
न जाने क्यूँ ये लगता है
वो वापस लौट आएगा
पकड़ कर हाथ वो मेरा
वो अपने हाथ में इक दिन
कहेगा सब गिले शिकवे भुला कर
आगे बढ़ते हैं
चलो हम साथ चलते हैं
कहीं हम दूर जा कर के
नई दुनिया बसाते हैं
मोहब्बत का कोई नग़्मा
बहम हम गुनगुनाते हैं
मगर सच और ही कुछ है
वो बिल्कुल भी नहीं ऐसा
कि न हरगिज़ वो आएगा
न मेरे होंठ चूमेगा
न सीने से लगाएगा
फ़क़त ये वहम है मेरा
वो वापस लौट आएगा















