दिल का सिक्का कहीं चला ही नहीं
खोट क्या था मुझे पता ही नहीं
बस लकीरें ही खींच दी मैं ने
प्यार तस्वीर में भरा ही नहीं
नाख़ुदा हो गया ख़फ़ा मुझ से
तो किनारा मुझे मिला ही नहीं
बात करनी थी दिल को तुझ से मगर
तू ने सीने पे सिर रखा ही नहीं
ज़ेहन में बस गया क़फ़स जिस के
वो परिंदा कभी उड़ा ही नहीं
— Meenakshi Masoom















