ये है तफ़्सीर-ए-रूदाद-ए-सफ़र दुनिया नहीं बदली
बदल के देख ली हर रहगुज़र दुनिया नहीं बदली
गुज़िश्ता सदियों से ये राय थी दुनिया के बारे में
बदल जाएगी ये दुनिया मगर दुनिया नहीं बदली
मिटाया ऐब ने हर इक हुनर हर इक हुनर ने ऐब
सभी मौजूद हैं ऐब-ओ-हुनर दुनिया नहीं बदली
तेरे ही साथ निकला था कभी दुनिया बदलने को
अकेला हूँ अभी जाऊँ किधर दुनिया नहीं बदली
मेरी दुनिया है मेरे ख़्वाबों की दुनिया में ख़ेमा-ज़न
उजड़ जाएगी ये दुनिया अगर दुनिया नहीं बदली
Read Full