एक ख़ुश-फ़हम को दुख क्या है बताने के लिए
शुक्रिया तेरा हमें 'इश्क़ में लाने के लिए
नींद काँटों पे भी हम चैन की सोए अक्सर
और फिर हमने सहारे तेरे शाने के लिए
हमने तो ख़्वाब भी देखा था किसी का शायद
ज़ेहन-ओ-दिल से तेरा हर नक़्श मिटाने के लिए
एक खिड़की थी हमारे सभी दुख बाँटती थी
और इक पेड़ था सीने से लगाने के लिए
ये जो हम हँसते हैं गाते हैं मज़े करते हैं
दाँत हाथी के हैं ये सिर्फ़ दिखाने के लिए
हम तो वहशत में चले आए ख़ला तक मोहित
ख़ाक बाक़ी ही नहीं ख़ाक उड़ाने के लिए
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Mohit Dixit
our suggestion based on Mohit Dixit
As you were reading Udasi Shayari Shayari