अपने रंगों उमंगों भरे आस्माँ परजैसे बे-रंग बादल कोई छा चुका हैमेरी नम आँखों पर क्यूँ परेशान हो तुमयार इनमें तो सैलाब तक आ चुका है— Mohit Dixit