naya hai shahar naye aasre talash karoon | नया है शहर नए आसरे तलाश करूँँ

  - Mohsin Naqvi

नया है शहर नए आसरे तलाश करूँँ
तू खो गया है कहाँ अब तुझे तलाश करूँँ

जो दश्त में भी जलाते थे फ़स्ल-ए-गुल के चराग़
मैं शहर में भी वही आबले तलाश करूँँ

तू अक्स है तो कभी मेरी चश्म-ए-तर में उतर
तिरे लिए मैं कहाँ आइने तलाश करूँँ

तुझे हवा से की आवारगी का इल्म कहाँ
कभी मैं तुझ को तिरे सामने तलाश करूँँ

ग़ज़ल कहूँ कभी सादास ख़त लिखूँ उस को
उदास दिल के लिए मश्ग़ले तलाश करूँँ

मिरे वजूदस शायद मिले सुराग़ तिरा
कभी मैं ख़ुद को तिरे वास्ते तलाश करूँँ

मैं चुप रहूँ कभी बे-वज्ह हँस पड़ूँ 'मोहसिन'
उसे गँवा के 'अजब हौसले तलाश करूँँ

  - Mohsin Naqvi

Sad Shayari

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