mehfil men aaj marsiya-khwani hi kyun na ho | महफ़िल में आज मर्सिया-ख़्वानी ही क्यूँँ न हो

  - Munawwar Rana

महफ़िल में आज मर्सिया-ख़्वानी ही क्यूँँ न हो
आँखों से बहने दीजिए पानी ही क्यूँँ न हो

नश्शे का एहतिमाम से रिश्ता नहीं कोई
पैग़ाम उस का आए ज़बानी ही क्यूँँ न हो

ऐसे ये ग़म की रात गुज़रना मुहाल है
कुछ भी सुना मुझे वो कहानी ही क्यूँँ न हो

कोई भी साथ देता नहीं उम्र-भर यहाँ
कुछ दिन रहेगी साथ जवानी ही क्यूँँ न हो

इस तिश्नगी की क़ैदस जैसे भी हो निकाल
पीने को कुछ भी चाहिए पानी ही क्यूँँ न हो

  - Munawwar Rana

Jawani Shayari

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