hamaare haafeze be-kaar ho ga.e saahib | हमारे हाफ़िज़े बे-कार हो गए साहिब

  - Nadeem Bhabha

हमारे हाफ़िज़े बे-कार हो गए साहिब
जवाब और भी दुश्वार हो गए साहिब

उसे भी शौक़ था तस्वीर में उतरने का
तो हम भी शौक़ से दीवार हो गए साहिब

तिरे लिबास के रंगों में खो गई फ़ितरत
ये फूल-शूल तो बे-कार हो गए साहिब

गले लगा के उसे ख़्वाब में बहुत रोए
और इतना रोए कि बेदार हो गए साहिब

हमारी रूह परिंदों को सौंप दी जाए
कि ये बदन तो गुनहगार हो गए साहिब

नज़र मिलाई तो इक आग ने लपेट लिया
बदन जलाए तो गुलज़ार हो गए साहिब

चराग़ दफ़्न किए थे 'नदीम' क़ब्रों में
ज़मीं से चाँद नुमूदार हो गए साहिब

  - Nadeem Bhabha

Chehra Shayari

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