वो क्या करेगा हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देख कर

जो रो पड़ा है बस मिरे अश'आर देख कर

सहरा में रह रहे हैं कि गुलशन सॅंवर सके
घर बार हम ने छोड़ा है घर बार देख कर

अब की जो गिर गया तो सिमट पाएगा नहीं
दिल ले तो तुम रहे हो मगर यार देख कर

रोटी की थी तलाश तो इस पार आए थे
अब रो रहे हैं अपनो को उस पार देख कर

साहिल हमारी ज़िंदगी बदली है इस तरह
हम डर गए हैं वक़्त की रफ़्तार देख कर

— Naved sahil

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Gulshan Shayari

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