"मीठी तक़रार"
मेरे हालात को तुम जानकर क्यूँ मुस्कुराते हो
फ़क़त ख़ामोश रहते हो निगाहें क्यूँ चुराते हो
जो दिल में बात है मुझ को भला कहके तो देखो तुम
ये नज़रें चार हों कैसे मुझे तुम भूल जाते हो
हज़ारों ख़्वाब ऐसे हैं जो पूरे हो नहीं सकते
मुहब्बत के सफ़र में दिल अधूरे हो नहीं सकते
मिलें मुझ को सितारे चाँद क़दमों में इन्हें लाऊॅं
ये वा'दा करते हो मुझ से उसी पल भूल जाते हो
किसी के प्यार को कमतर समझना यूँ कहानी है
मुहब्बत को निभाना ज़िंदगी की भी रवानी है
तेरा जो साथ है मुझ को तो सारी ज़िंदगानी है
बदलते वक़्त में अक्सर वो बातें भूल जाते हो
— Naviii dar b dar















