yuñ basar zindagi ho nahin sakti hai | यूँँ बसर ज़िन्दगी हो नहीं सकती है

  - Neeraj Neer

यूँँ बसर ज़िन्दगी हो नहीं सकती है
'उम्र भर शाइरी हो नहीं सकती है

हूँ मैं बेटा बड़ा दुख मिरे है कईं
इसलिए ख़ुदकुशी हो नहीं सकती है

और तुम प्यार थे इसलिए कह रहा
दरमियाँ दोस्ती हो नहीं सकती है

दो इजाज़त कि अब चीखना है मुझे
हिज्र में ख़ामुशी हो नहीं सकती है

हैफ़ देनी पड़ेगी ख़बर माँ को फिर
शहर से वापसी हो नहीं सकती है

'नीर' पे दोस्त वहशत है बस 'मीर' की
उस से अब नौकरी हो नहीं सकती है

  - Neeraj Neer

Friendship Shayari

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