शायद ख़ुदा तू है नहीं वरना तो देखता
करता नहीं अलग तू मोहब्बत जो देखता
मैं टकटकी सी बाँध के बस उस को देखता
वो पहले सब को देखता फिर मुझ को देखता
सब फूल थे गुलाब के सब कुछ हसीन था
अब तुम बताओ यार मैं किस किस को देखता
मुझ को अगर वो देखता तो क्या वो देखता?
ये भी अगर मैं देखता तो क्या वो देखता
मेरा इलाज हो न सका इस लिए मियाँ
मर जाता दर्द से जो मेरे घाव देखता
पत्थर सा मेरा दिल भी पिघल पड़ता जब कहीं
रोता हुआ अगर मैं किसी माँ को देखता
बेरोज़गार होने की इक वजह है ये भी
सब काम धंधा छोड़ के मैं तुझ को देखता
— NISHKARSH AGGARWAL















