अंधेरेढूँडनेनिकलेखंडरक्यूँँ
ख़ुदाजानेहुएयेदर-ब-दरक्यूँँ
येबूउजड़ेहुएबाज़ारकीहै
मिरीबस्तीहुईना-मो'तबरक्यूँँ
समा'अतमुंजमिदसीहोरहीहै
मगरशोला-बयानीपरअसरक्यूँँ
अगरएहसासहीहैरत-ज़दाहै
तोकाँधेपरलिएफिरतेहोसरक्यूँँ
येबोझलशामकाधुँदलातसव्वुर
मिरेएहसासपरछायामगरक्यूँँ
मिज़ाज-ए-शहरमेंतब्दीलियांहैं
मिरेतेवरबदलतेदेखकरक्यूँँ
जहाँपत्थरतराशेजारहेहों
वहाँख़ेमालगाएँशीशागरक्यूँँ
ख़लासेदेखनाहै'रिंद'दुनिया
तोफिरठहरूँपुरानेचाँदपरक्यूँँ