हो गई है सुलह सब अब शायरी होगी नहीं
मोम सारा जल गया अब रौशनी होगी नहीं
क्या लगा है मैं भी उनके आस्तीं का साँप हूँ
यार देखो हम सेे उनकी मुख़बरी होगी नहीं
'इश्क़ में हम पर हुआ है इक सितम ऐसा की अब
दुश्मनी हो जाएगी पर दोस्ती होगी नहीं
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