ख़्वाब मानिंद ही आशिक़ी तो मिले
जीने की फिर वजह लाज़िमी तो मिले
बेख़ुदी तीरगी में रहे अब ये दिल
तेरी यादों की ही रौशनी तो मिले
रब का कर शुक्र सब नेमतें जो मिली
फिर ज़रूरी है अब बंदगी तो मिले
बे-रुख़ी भी तेरी सहन जो हँस के की
अब तेरा लहजा भी मखमली तो मिले
'प्रीत' कहती निभाने हैं रिश्ते सभी
बस मुहब्बत की वो दिल-कशी तो मिले
— Harpreet Kaur















