फिर वही ज़िक्र है फिर वही सवाल है

बस अभी तौबा है फिर वही ख़याल है

ढूँढ़ता फिर रहा, कौन है किधर गया
शख़्स आईने में था अभी, कमाल है

एक जैसे हैं, वो और उस की बात भी
आ सके तेरी-मेरी समझ, मजाल है

दो ज़रा बात कर कोई ग़म ठहर ज़रा
ज़िंदगी सी कहाँ ज़िंदगी मुहाल है

एक पल सच लगे एक पल मुग़ालता
कौन सा अर्श है कौन सा ज़वाल है

ज़िंदगी कुछ है, तेरे ख़याल के सिवा
ये तेरा हिज्र है या तेरा विसाल है

— pankaj pundir

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