kabhi manzil kabhi rastaa lagega | कभी मंज़िल कभी रस्ता लगेगा

  - Atul K Rai

कभी मंज़िल कभी रस्ता लगेगा
नहीं मानोगे तो सदमा लगेगा

तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना
हमें रोना पड़े अच्छा लगेगा

कहानी अब सुनो संज़ीदगी से
ग़जल छोड़ो यहाँ भद्दा लगेगा

लबों से चूमकर जो तुम खिला दो
वही बिस्किट हमें खस्ता लगेगा

चले आए टपोरी क्लास करने
नहीं मालूम था बस्ता लगेगा

बहुत महँगा पड़ा है हिज्र हमको
बहुत लोगों को ये सस्ता लगेगा

ज़बरदस्ती नहीं है यार लेकिन
चले आओ बड़ा अच्छा लगेगा

कहानी से हमें बर्ख़ास्त कर दो
वही किरदार बस सच्चा लगेगा

  - Atul K Rai

Dost Shayari

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