अब तक उसी से प्यार की आदत बनी रही
उस के ही साथ जीने की चाहत बनी रही
पत्थर के हैं सनम हमें मालूम है मगर
फिर भी बुतों की जग में इबादत बनी रही
ईमान धर्म की जहाँ बहती हवाएँ हैं
फिर भी दिलों में सबके सियासत बनी रही
दोनों के बीच कितनी ग़लत फ़हमियाँ रहीं
इन सब के बावजूद मुहब्बत बनी रही
धोते रहे हैं जिस्म वज़ू भी बहुत किए
‘रोहित’ मगर दिलों में नजासत बनी रही
— Rohit Asthana Prabhav















