नज़रआनेलगेहोमेहरबाँसे
येअंदाज़आगएतुममेंकहाँसे
किसेरासआएगीतेरीख़ुदाई
अगरहमउठगएबज़्म-ए-जहाँसे
भरमखुलजाएगातेरेकरमका
अगरकुछकहदियाहमनेज़बाँसे
कहाँसेआगयायेअब्र-ए-रहमत
हमेंकुछकामथाबर्क़-ए-तपाँसे
जिसेदेखोवहीमतलबकाबंदा
मोहब्बतउठगईरू-ए-जहाँसे
करेंगेज़िक्रतेरेहुस्नकाभी
अगरफ़ुर्सतमिलीकार-ए-जहाँसे
तड़पतीफिररहीहैबर्क़अबतक
उलझबैठीथीमेरेआशियाँसे
यूँँहीरोतीनहीं'साबिर'कोदुनिया
उसेभीइश्क़थाअहल-ए-जहाँसे