अश्क रुख़सार तक नहीं पहुँचे
दामन-ए-यार तक नहीं पहुँचे
तुझ को कहते हैं बे-वफ़ा वो जो
तेरे मेआ'र तक नहीं पहुँचे
घोंसले से गिरे ज़मीं पर जो
अब तलक डार तक नहीं पहुँचे
पंखुड़ी छू के लौट आए सब
कोई भी ख़ार तक नहीं पहुँचे
— Sagar Kaushik
दामन-ए-यार तक नहीं पहुँचे
तुझ को कहते हैं बे-वफ़ा वो जो
तेरे मेआ'र तक नहीं पहुँचे
घोंसले से गिरे ज़मीं पर जो
अब तलक डार तक नहीं पहुँचे
पंखुड़ी छू के लौट आए सब
कोई भी ख़ार तक नहीं पहुँचे
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