hañs de to khile kaliyaan gulshan men bahaar aa.e | हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आए

  - SALIM RAZA REWA

हँस दे तो खिले कलियाँ गुलशन में बहार आए
वो ज़ुल्फ़ जो लहराएँ मौसम में निखार आए

मिल जाए कोई साथी हर ग़म को सुना डालें
बेचैन मिरा दिल है पल भर को क़रार आए

मदहोश मेरा दिल है बेचैन है ये साँसें
देखा है तुझे जब से आँखों में ख़ुमार आए

खिल जाएँगी ये कलियाँ महबूब के आमद से
जिस राह से वो गुज़रे गुलशन में बहार आए

जिन जिन पे इनायत है जिन जिन से मोहब्बत है
उन चाहने वालों में मेरा भी शुमार आए

फूलों को सजाया है पलकों को बिछाया है
ऐ बाद-ए-सबा कह दे अब जाने बहार आए

बुलबुल में चहक तुम से फूलों में महक तुम से
रुख़्सार पे कलियों के तुम से ही निखार आए

  - SALIM RAZA REWA

Mausam Shayari

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