क़हर यूँ मुझ पे ढाती है तेरी आँखें
मुझे पागल बनाती है तेरी आँखें
दिखावा है मुझे गुमराह करने का
मुहब्बत को जताती है तेरी आँखें
ज़बाँ ख़ामोश रहती है यही दुख है
मगर सब सच बताती है तेरी आँखें
सुनो तुम से तो होता है नहीं कुछ भी
फ़र्ज़ अपना निभाती है तेरी आँखें
तेरे बिन तो सुनी है ज़िंदगी मेरी
चराग़ों को जलाती है तेरी आँखें
— Sandeep Gandhi Nehal















