सुनो है गुज़ारिश इजाज़त करोगे?
मुझे आप क्या बस मोहब्बत करोगे?
किए जा रहा हूँ इनायत "ख़ुदा" की!
मिरे, ख़ातिर "जानाँ" इबादत करोगे?
अगर जो, परेशां तू मुझ से कभी हो!
पिताजी से, नईं ना शिकायत करोगे?
लडूंगा सभी से तुम्हारे लिए मैं!
ज़मानें से, मेरी हिफ़ाज़त करोगे?
वफ़ा का "व" तक तो पता ही नहीं है!
मुझी से, सनम अब, नफ़ासत करोगे?
— Sandeep Gandhi Nehal















