है इसी बात का मलाल मुझे
पूछना था कोई सवाल मुझे
चाहिए मुझ को उस की शक्ल पढूँ
क्यूँ बताए वो हाल चाल मुझे
मैं भी सम्त-ए-उरूज़ बढ़ जाता
खींचता गर नहीं ज़वाल मुझे
माँ ये कहती है सब से अच्छा हूँ
बहनें कहती हैं बा-कमाल मुझे
लुत्फ़ बर्बादियों में आता है
अब अज़ीयत से मत निकाल मुझे
— Sanjay shajar















