है इसी बात का मलाल मुझेपूछना था कोई सवाल मुझेचाहिए मुझ को उस की शक्ल पढूँक्यूँ बताए वो हाल चाल मुझेमैं भी सम्त-ए-उरूज़ बढ़ जाताखींचता गर नहीं ज़वाल मुझेमाँ ये कहती है सब से अच्छा हूँबहनें कहती हैं बा-कमाल मुझेलुत्फ़ बर्बादियों में आता हैअब अज़ीयत से मत निकाल मुझे— Sanjay shajar