अश्क उम्मीदें वफ़ा रिश्ता नहीं
झाँक मेरी आँखों में क्या क्या नहीं
आख़िरी सिगरेट बुझने वाली है
फ़ोन उनका अब तलक आया नहीं
आशिक़ी से बच निकलने के लिए
कोई रस्ता कोई दरवाज़ा नहीं
सिर्फ़ मेरा होके तू रहता ए दोस्त
सच में सच ये ख़्वाब हो पाया नहीं
मैं उसे आवाज़ देती जाती हूँ
और वो सुनकर भी सदा सुनता नहीं
ख़ौफ़ में आकर के सर का झुकना दोस्त
कुछ भी हो सकता है पर सजदा नहीं
आपका किरदार होता है अयाँ
आइने में जो है वो चेहरा नहीं
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