अपनी सीरत से कुछ जुदा निकला
फ़्रेम तस्वीर से बड़ा निकला
पास आने से घर महकने लगे
बात करने से सिलसिला निकला
काफ़िरों ने जो दिल से ढूँढा तो
बुत के भीतर से भी ख़ुदा निकला
ज़ख़्म लगकर रहा फ़क़त दिल से
दर्द निकला तो सब जगह निकला
ये वफ़ाओं का ऐब है अपनी
जिसको चाहा वो बेवफ़ा निकला
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