har ek peeda ki davaa hoti nahin | हर एक पीड़ा की दवा होती नहीं

  - Sarvjeet Singh

हर एक पीड़ा की दवा होती नहीं
हर बात लफ़्ज़ों से बता होती नहीं

कोशिश तो करता हूँ मगर मैं क्या करूँँ
उसके लिए मुझ सेे दुआ होती नहीं

कुछ ख़ास ही मुझ सेे लगावट है उसे
बाक़ी किसी से वो खफ़ा होती नहीं

वो बेवफ़ा कहता है मुझको रात-दिन
जिस शख़्स से ख़ुद ही वफ़ा होती नहीं

क्यूँ जोड़ते हो दिल कहीं पर इस तरह
जब अंत में तुम सेे निभा होती नहीं

मैं चाहता हूँ ये कि वो आवाज़ दे
लेकिन कभी उसकी सदा होती नहीं

नाराज़गी उस से मिरी काफ़ी मगर
वो काम बोले गर तो ना होती नहीं

  - Sarvjeet Singh

Ibaadat Shayari

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